दिमाग को अगर युवा रखना है तो ब्लड प्रेशर नॉर्मल नहीं, ऑप्टिमल होना चाहिए – रिसर्च

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Normal BP is not enough for good health : आजकल की लाइफस्टाइल में हाई बीपी (High Blood Presure) की बीमारी होना एक सामान्य बात है. ज्यादा समय तक एक जगह बैठने, फिजिकल एक्टिविटी कम होने, अनियमित खानपान और तनाव लेने की वजह से कम उम्र में लोग बीपी के शिकार हो जाते हैं. ब्लड प्रेशर का ज्यादा होना हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और डिमेंशिया के रिस्क को बढ़ा देता है. लेकिन एक नई स्टडी में पता चला है कि अगर ब्लड प्रेशर ऑप्टिमल (optimal) यानी नॉर्मल या नॉर्मल से थोड़ा कम रहे तो ये न सिर्फ आपको गंभीर बीमारियों से बचाएगा, बल्कि आपके दिमाग को भी जवान रख सकता है.

अगर आप अपने नॉर्मल बीपी से संतुष्ट हैं, तो इसके बारे में दोबारा सोचने के जरूरत है. दैनिक जागरण अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी (ANU) के साइंटिस्टों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि ऑप्टिमल ब्लड प्रेशर हमारे ब्रेन को वास्तविक उम्र से कम से कम 6 महीने युवा रखने में मदद करता है.

रिसर्चर्स का कहना है कि इस स्टडी के नतीजों को रिफ्लेक्ट (परिलक्षित) करते हुए नेशनल हेल्थ गाइडलाइंस (National health guidelines) को अपडेट किया जाना चाहिए. फ्रंटियर्स इन एजिंग न्यूरोसाइंस (Frontiers in Aging Neuroscience) जर्नल में प्रकाशित एएनयू की स्टडी में बताया गया है कि क्योंकि ब्लड प्रेशर जल्दी बूढ़ा बनाता है, इसलिए ब्रेन भी कमजोर होता है, जिससे हार्ट से संबंधित बीमारियां, स्ट्रोक और डिमेंशिया का रिस्क बढ़ता है.

क्या कहते हैं जानकार
एएनयू सेंटर सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एजिंग, हेल्थ एंड वेलबीइंग के प्रोफेसर नकोलस चेरबुइन (Nicolas Cherbuin) ने कहा कि यह सोचना पूरी तरह से सच नहीं है कि हाई बीपी के कारण ही बाद में ब्रेन बीमार होता है. बल्कि ये उन लोगों में भी शुरू हो जाता है, जिनका बीपी सामान्य रहता है.

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स्टडी में क्या निकला
स्टडी के को-राइटर वॉल्टर अभयरत्न (Walter Abhayaratna) ने बताया कि यदि हम अपना बीपी ऑप्टिमल बनाए रखते हैं, तो ये ब्रेन को यंग और हेल्दी रखने में मददगार है. वो आगे कहते हैं कि जिन लोगों का बीपी 135/85 बना रहा, उनकी तुलना में ऑप्टिमल बीपी यानी 110/70 वाले मीडियम एज के लोगों का ब्रेन 6 महीने ज्यादा युवा पाया गया.

रिसर्चर्स ने 44 से 76 साल के एज ग्रुप के 686 हेल्दी लोगों के 2000 से ज्यादा ब्रेन स्कैन की स्टडी की है. रिसर्च के दौरान 12 सालों तक प्रतिभागियों का रोजाना 4 बार बीपी मापा गया. बीपी डेटा और ब्रेन स्कैन का यूज ब्रेन की उम्र और हेल्थ के आंकलन के लिए किया गया. स्टडी का निष्कर्ष 20-30 साल उम्र वाले युवाओं की दृष्टि से ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि इनमें बढ़े हुए बीपी का ब्रेन में असर दिखने में समय लगता है.

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क्या है नॉर्मल और ऑप्टिमल बीपी
नॉर्मल बीपी 120/80 एमएम एचजी को माना जाता है. जबकि ऑप्टिमल या स्वास्थ्यकारक बीपी 110/70 के करीब माना जाता है. यदि सिस्टोलिक प्रेशर (systolic pressure) 120 से 129 और डायलेस्टिक प्रेशर (dialystic pressure) 80 एमएम एचजी बना रहे, तो इस स्थिति को बढ़ा ब्लड प्रेशर माना जाता है. सिस्टोलिक प्रेशर मतलब धमनियों में उस दाब से है, जो हार्ट की मसल्स के संकुचन (contraction) से ब्लड पंप होने से पैदा होता है. जबकि डायस्टोलिक प्रेशर धमनियों के उस दाब को दर्शाता है, जो संकुचन के बाद हार्ट की मसल्स के शिथिल (loose) होने पर होता है.

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