Social Media की कैद में बंद है आपकी मेंटल हेल्थ!, अनजाने में आप बन रहे हैं बीमार

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सोशल मीडिया… ये कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इन दो शब्दों के अंदर पूरा समाज व विश्व सिमट कर रह गया है. वर्तमान में अगर कोई हथियार सबसे ताकतवर है, तो वो सोशल मीडिया है. आप क्या हैं और क्या सोचते हैं, वो सिर्फ आपका सोशल मीडिया हैंडल देखकर पता लगाया जा सकता है. इसलिए संस्थानों द्वारा किसी पद के लिए उम्मीदवार का चयन हो या फिर शादी के लिए लड़का-लड़की का चुनाव, उनके बारे में जानने के लिए सबसे पहले उनके सोशल मीडिया अकाउंट देखने का चलन आम हो गया है. यहां तक कि लोकतांत्रिक देशों में चुनाव प्रचार का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर चलाया जाता है. ये बातें सोशल मीडिया की ताकत को बखूबी दर्शाती हैं.

क्या सोशल मीडिया स्वास्थ्य को प्रभावित करता है?

जब सोशल मीडिया हमारी जिंदगी के छोटे-बड़े सभी निर्णयों में एक अभिन्न भागीदारी निभा रहा है, तो हमारे स्वास्थ्य से ये कैसे अछूता रह सकता है? तो क्या सोशल मीडिया हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है? इसका सीधा और सरल जवाब है- हां! सोशल मीडिया के कारण आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों के बारे में एक्सपर्ट पिछले काफी समय से चेतावनी देते आ रहे हैं. 15 जून 2020 में NCBI पर छपी रिसर्च के मुताबिक, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल आपके मानसिक स्वास्थ्य को कैद करके आपको अवसाद, चिंता व तनाव आदि का शिकार बना रहा है. जिसके कारण नींद में कमी (इंसोम्निया), डायबिटीज, दिल व दिमाग के रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है.

 

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सोशल मीडिया का मजा ही है खतरा!

अमेरिका के Mclean Hospital का कहना है कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से हमारे दिमाग में डोपामाइन हॉर्मोन का उत्पादन होता है. यह हॉर्मोन ‘फील-गुड केमिकल’ के नाम से भी जाना जाता है, मतलब साफ है कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से आपको अच्छा महसूस होता है. यह ठीक उसी तरह आनंद देता है, जैसे हमें स्वादिष्ट खाना खाने, गेम खेलने, किसी खास व्यक्ति से मिलने पर अच्छा लगता है. Mclean Hospital के मुताबिक, हम इस आनंद को लेने के लिए बार-बार सोशल मीडिया पर जाते हैं.

 

Mclean के मुताबिक सोशल मीडिया पर जाने का हमारा मुख्य उद्देश्य नये लोगों से मिलना, अपने बारे में जिक्र होते देखना, सोशल नेटवर्क बढ़ाना, अपनी तारीफ सुनना, अपने पोस्ट व फोटो पर लाइक्स या कमेंट देखना आदि होता है. जब इन सभी चीजों में कमी आने लगती है या आपको नकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगती है, तो आपके आनंद में कमी आती है और आप अवसाद, चिंता, बेचैनी, उदासी व तनाव आदि में डूबने लगते हैं. कुछ समय पहले इसी डर को ध्यान में रखते हुए इंस्टाग्राम ने एक ऐसा फीचर मार्केट में उतारा था, जिसमें आपको दूसरे यूजर की फोटो या वीडियो पर आए लाइक्स की संख्या का पता नहीं चलता है. आपको बता दें कि DATAREPORTAL के मुताबिक, जनवरी 2021 तक भारत में करीब 44 करोड़ 80 लाख लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. जिसमें से करीब 7 करोड़ 80 लाख लोग सिर्फ 2020 से 2021 के बीच बढ़े हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितने लोगों का मानसिक स्वास्थ्य सोशल मीडिया के कारण प्रभावित हो सकता है और लोग कितनी तेजी से सोशल मीडिया की तरफ खींचे चले आ रहे हैं.

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FOMO के कारण भी बढ़ सकती है एंग्जायटी और डिप्रेशन
जैसा कि हमने ऊपर जाना कि DATAREPORTAL के मुताबिक 2020 से 2021 के बीच सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या भारत में करीब 7 करोड़ 80 लाख बढ़ी है. इसके पीछे लॉकडाउन एक वजह है, लेकिन दूसरी वजह FOMO भी हो सकता है. FOMO का मतलब है Fear Of Missing Out (पीछे छूट जाने का डर). जब सड़क पर चलते हुए व्यक्ति, मेट्रो में अपने साथ वाली सीट पर बैठे हुए यात्री या सोशल सर्किल में मौजूद हर शख्स को हम सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते देखते हैं, तो हमें खुद के दुनिया से पीछे छूट जाने का डर सताता है. Mclean Hospital के मुताबिक, लोगों को लगता है कि वह समसामायिक जानकारी, फायदे और सुविधाओं से सोशल मीडिया इस्तेमाल ना करने के कारण वंचित हो सकते हैं. जो कि उन्हें चिंताग्रस्त और अवसादग्रस्त बना सकता है.

मानसिक स्वास्थ्य खराब होने से शारीरिक समस्याओं का बढ़ जाता है खतरा
2018 की एक ब्रिटिश स्टडी के मुताबिक अत्यधिक सोशल मीडिया का इस्तेमाल आपकी नींद में कमी, बाधा या देरी का कारण बन सकता है. जिसकी वजह से डिप्रेशन, याद्दाश्त में कमी, मानसिक क्षमता का घटना आदि समस्याएं हो सकती है. शोधकर्ताओं ने मानसिक व पेट के स्वास्थ्य के बिगड़ने के कारण जी मिचलाना, सिरदर्द, मांसपेशियों में तनाव आदि समस्याओं के बढ़ते खतरे की भी चेतावनी दी.

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मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव कैसे कम करें?
अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से दूर रखना चाहते हैं, तो निम्नलिखित टिप्स जरूर अपनाएं.

  • सोशल मीडिया से ब्रेक लें.
  • जब सोशल मीडिया इस्तेमाल ना कर रहे हों, तो ऐप नोटिफिकेशन को बंद रखें.
  • जो लोग आपके लिए नेगेटिव रहते हैं, उन्हें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दें.
  • सोशल मीडिया इस्तेमाल करने का समय निर्धारित करें.
  • सोशल मीडिया से बाहर अपनी खुशी ढूंढें.
  • दोस्तों या परिवारवालों के साथ सोशल मीडिया से दूर रहें.

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.





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